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एलडीए जोन-5 का जेई दिनेश घूस लेते गिरफ्तार

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15 लाख की मांगी थी रिश्वत, 7.5 लाख लेते लविप्रा का जेई, सुपरवाइजर और दलाल रंगे हाथ गिरफ्तार,जोनल अधिकारी रवि नंदन सिंह का जांबाज इंजीनियर था दिनेश ,विजिलेंस का बड़ा एक्शन

 गिरीश तिवारी

लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण के अवर अभियंता ( जूनियर इंजीनियर) दिनेश कुमार वर्मा, सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश और बिचौलिया (दलाल) श्रवण कुमार को 15 लाख रुपये की भारी-भरकम घूस मांगने और उसकी पहली किस्त के रूप में 7:50 लाख रुपए की बड़ी रकम लेते समय विजिलेंस की टीम ने रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया है। तीनों पर अवैध निर्माण पर कार्रवाई रोकने और आईजीआरएस शिकायत का निस्तारण कराने के एवज में रिश्वत वसूल रहा था।

 लखनऊ विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष प्रवेश कुमार के कार्यकाल में आइजीआरएस पोर्टल और आरटीआई का संज्ञान ही लिया जाता है, अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देश हैं कि अधिवक्ताओं और पत्रकारों की शिकायतों को इग्नोर करके इंजीनियर अपने 'काम' में जुटे रहे, यही कारण है कि पिक एंड चूज़ की नीति को अपनाते हुए जूनियर इंजीनियर से लेकर जोनल अधिकारी तक अपने मूड के हिसाब से जो नहीं दे रहा है, सिर्फ उसी की अवैध बिल्डिंग पर ही कार्रवाई करते हैं। लखनऊ विकास प्राधिकरण का जोन-5 काफी चर्चित रहा है। इसके पहले यहां पर पीसीएस अधिकारी वंदना पांडे जोनल अधिकारी के रूप में तैनात थी। पिछले दिनों उनका ट्रांसफर अयोध्या में एसडीएम के पद पर हो गया है, ऐसे में उनके समय में जितनी अवैध बिल्डिंग बनी थी, उन पर अब कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। अब जोन-2 के जोनल अधिकारी रवि नंदन सिंह के पास जोन-5 का अतिरिक्त काम देख रहे हैं। रवि नंदन सिंह को जानने के लिए उनका जोन-दो उनके बारे में बताने के लिए काफी है।


पूरा मामला तब सामने आया जब पीड़ित शिकायतकर्ता ने उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (लखनऊ सेक्टर) के पुलिस अधीक्षक के समक्ष गुहार लगाई। शिकायतकर्ता ने बताया कि एलडीए में तैनात अवर अभियंता (जेई) दिनेश कुमार वर्मा उसके निर्माण कार्य को बंद कराने और सील करने की लगातार धमकी दे रहे थे। जेई ने पीड़ित से कहा कि इस निर्माण से जुड़ी एक शिकायत आईजीआरएस पोर्टल पर लंबित है। मामले को खत्म कराने के लिए उन्हें एक निजी व्यक्ति (दलाल) श्रवण कुमार से संपर्क करने को कहा गया।

अस्पताल के गेट से एलडीए दफ्तर तक विजिलेंस अधिकारियों ने जाल बिछा रख रहा था। मिली जानकारी के अनुसार बिचौलिए श्रवण कुमार ने एक अस्पताल के गेट पर शिकायतकर्ता से मुलाकात कर मामला दबाने के बदले 15 लाख रुपये की डिमांड रखी। इसके बाद जब पीड़ित ने एलडीए कार्यालय में अवर अभियंता दिनेश कुमार वर्मा और सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश से मुलाकात की, तो दोनों अधिकारियों ने भी रिश्वत की इस मांग पर अपनी सहमति जताई। जब पीड़ित ने एकमुश्त 15 लाख रुपये देने में लाचारी जाहिर की, तो आरोपियों ने 7.5-7.5 लाख रुपये की दो किस्तों में भुगतान करने की डील फाइनल की।

रिश्वत की रकम देने के बजाय जागरूक शिकायतकर्ता ने विजिलेंस का दरवाजा खटखटाया। सतर्कता अधिष्ठान ने मामले की गोपनीय जांच कराई, जिसमें रिश्वत मांगने की बात पूरी तरह सच पाई गई। इसके बाद विजिलेंस की ट्रैप टीम ने पुख्ता रणनीति के तहत जाल बिछाया। जैसे ही शिकायतकर्ता से रिश्वत की पहली किस्त (7.5 लाख रुपये) ली जा रही थी, विजिलेंस टीम ने घेराबंदी कर जेई दिनेश कुमार वर्मा, सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश और बिचौलिए श्रवण कुमार को रंगे हाथ दबोच लिया।

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